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mahabharat 6.77.60-61: जनेश्वर! आपकी सेना भीमसेन के भय और धृष्टद्युम्न के बाणों से व्याकुल हो रही थी। इसलिए वह अभिमन्यु आदि महाधनुर्धर योद्धाओं को रोकने में असमर्थ थी। वह मद और मूर्छा के वशीभूत होकर मतवाली स्त्री के समान मार्ग पर चुपचाप खड़ी थी। 60-61॥   |   mahabharat अध्याय 6.77: भीमसेन, धृष्टद्युम्न तथा द्रोणाचार्यका पराक्रम   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 77: भीमसेन, धृष्टद्युम्न तथा द्रोणाचार्यका पराक्रम  »  श्लोक 60-61
 
 
श्लोक  6.77.60-61 
तान् प्रयातान् महेष्वासानभिमन्युपुरोगमान्।
भीमसेनभयाविष्टा धृष्टद्युम्नविमोहिता॥ ६०॥
न संवारयितुं शक्ता तव सेना जनाधिप।
मदमूर्च्छान्वितात्मा वै प्रमदेवाध्वनि स्थिता॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
जनेश्वर! आपकी सेना भीमसेन के भय और धृष्टद्युम्न के बाणों से व्याकुल हो रही थी। इसलिए वह अभिमन्यु आदि महाधनुर्धर योद्धाओं को रोकने में असमर्थ थी। वह मद और मूर्छा के वशीभूत होकर मतवाली स्त्री के समान मार्ग पर चुपचाप खड़ी थी। 60-61॥
 
Janeshwar! Your army was distraught with the fear of Bhimsen and the arrows of Dhrishtadyumna. Therefore, she was not able to stop the attacking warriors like Abhimanyu and other great archers. She stood silently on the road like a drunken woman under the influence of intoxication and unconsciousness. 60-61॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)