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mahabharat 6.77.51-52: महाराज! यह सुनकर महाधनुर्धर भारद्वाजपुत्र द्रोणाचार्य तुरंत ही युद्धभूमि छोड़कर वहाँ पहुँचे। वहाँ पहुँचकर उन महारथी ने देखा कि धृष्टद्युम्न और भीमसेन उस महासमर में विचरण कर रहे हैं और आपका पुत्र मोहग्रस्त होकर वहीं पड़ा हुआ है। 51-52।   |   mahabharat अध्याय 6.77: भीमसेन, धृष्टद्युम्न तथा द्रोणाचार्यका पराक्रम   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 77: भीमसेन, धृष्टद्युम्न तथा द्रोणाचार्यका पराक्रम  »  श्लोक 51-52
 
 
श्लोक  6.77.51-52 
ततो द्रोणो महाराज त्वरितोऽभ्याययौ रणात्।
तत्रापश्यन्महेष्वासो भारद्वाज: प्रतापवान्॥ ५१॥
धृष्टद्युम्नं च भीमं च विचरन्तौ महारणे।
मोहाविष्टांश्च ते पुत्रानपश्यत् स महारथ:॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
महाराज! यह सुनकर महाधनुर्धर भारद्वाजपुत्र द्रोणाचार्य तुरंत ही युद्धभूमि छोड़कर वहाँ पहुँचे। वहाँ पहुँचकर उन महारथी ने देखा कि धृष्टद्युम्न और भीमसेन उस महासमर में विचरण कर रहे हैं और आपका पुत्र मोहग्रस्त होकर वहीं पड़ा हुआ है। 51-52।
 
Maharaj! On hearing this, the mighty archer and son of Bharadwaj, Dronacharya immediately left the battlefield and reached there. On reaching there, that great warrior saw that Dhrishtadyumna and Bhimsen were roaming around in that great battle and your son was lying there, overcome with delusion. 51-52.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)