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श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 77: भीमसेन, धृष्टद्युम्न तथा द्रोणाचार्यका पराक्रम  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  6.77.43 
शरैरवर्षन् द्रुपदस्य पुत्रं
यथाम्बुदा भूधरं वारिजालै:।
निहत्य तांश्चापि शरै: सुतीक्ष्णै-
र्न विव्यथे समरे चित्रयोधी॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
जैसे बादल पर्वत पर जल बरसाते हैं, उसी प्रकार उन्होंने द्रुपदपुत्र पर बाणों की वर्षा की। किन्तु विचित्र युद्ध करने वाले धृष्टद्युम्न ने उस रणभूमि में अपने तीखे बाणों से उन सबको घायल कर दिया और स्वयं तनिक भी विचलित नहीं हुए।
 
Just as clouds pour down water on a mountain, similarly they showered arrows on the son of Drupada. But Dhrishtadyumna, who fought a strange battle, wounded them all with his sharp arrows in that battlefield and was himself not at all troubled.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)