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mahabharat 6.77.39: महामनस्वी धृष्टद्युम्न ने तुरन्त ही उसे अपने रथ पर बिठाया और उसके शरीर में लगे हुए बाणों को निकाल दिया। शत्रुओं के बीच में ही उसने भीमसेन को गले लगाकर उसे बहुत सान्त्वना दी। 39.   |   mahabharat अध्याय 6.77: भीमसेन, धृष्टद्युम्न तथा द्रोणाचार्यका पराक्रम   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 77: भीमसेन, धृष्टद्युम्न तथा द्रोणाचार्यका पराक्रम  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  6.77.39 
विशल्यमेनं च चकार तूर्ण-
मारोपयच्चात्मरथे महात्मा।
भृशं परिष्वज्य च भीमसेन-
माश्वासयामास स शत्रुमध्ये॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
महामनस्वी धृष्टद्युम्न ने तुरन्त ही उसे अपने रथ पर बिठाया और उसके शरीर में लगे हुए बाणों को निकाल दिया। शत्रुओं के बीच में ही उसने भीमसेन को गले लगाकर उसे बहुत सान्त्वना दी। 39.
 
The great-minded Dhrishtadyumna immediately made him sit on his chariot and removed the arrows stuck in his body. In the midst of the enemies, he embraced Bhimasena and consoled him completely. 39.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)