Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.77.37-38: विश्वविख्यात पराक्रमी एवं बलशाली द्रुपदपुत्र धृष्टद्युम्न ने देखा कि शस्त्रधारियों में श्रेष्ठ पाण्डवपुत्र भीमसेन पर चारों ओर से आक्रमण हो रहा है। एक अत्यंत संगठित, भयंकर सेना ने उन पर आक्रमण कर दिया है। यह देखकर धृष्टद्युम्न भीमसेन के पास गए और उन्हें आश्वस्त किया। उनके शरीर का प्रत्येक अंग बाणों से घायल हो रहा था। वे पैरों से क्रोधरूपी विष उगल रहे थे और हाथ में गदा लिए हुए प्रलयकाल के यमराज के समान शोभा पा रहे थे। | mahabharat अध्याय 6.77: भीमसेन, धृष्टद्युम्न तथा द्रोणाचार्यका पराक्रम । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
विश्वविख्यात पराक्रमी एवं बलशाली द्रुपदपुत्र धृष्टद्युम्न ने देखा कि शस्त्रधारियों में श्रेष्ठ पाण्डवपुत्र भीमसेन पर चारों ओर से आक्रमण हो रहा है। एक अत्यंत संगठित, भयंकर सेना ने उन पर आक्रमण कर दिया है। यह देखकर धृष्टद्युम्न भीमसेन के पास गए और उन्हें आश्वस्त किया। उनके शरीर का प्रत्येक अंग बाणों से घायल हो रहा था। वे पैरों से क्रोधरूपी विष उगल रहे थे और हाथ में गदा लिए हुए प्रलयकाल के यमराज के समान शोभा पा रहे थे।
The world-renowned valiant and powerful son of Drupada, Dhrishtadyumna saw that the best amongst the weapon bearers, Pandava's son Bhimasena, was being attacked from all sides. A fierce army, which was highly organized, had attacked him. Seeing this, Dhrishtadyumna went to Bhimasena, reassuring him. Every part of his body was being wounded by arrows. He was spitting venom in the form of anger on foot and with a mace in his hand, he looked like Yamaraja at the time of doomsday.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥