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mahabharat 6.77.27: सारथि! भीमसेन को युद्धभूमि में छोड़कर तथा पाण्डवों से मोह भंग करके अब मेरे जीवन का कोई उपयोग नहीं है॥ 27॥   |   mahabharat अध्याय 6.77: भीमसेन, धृष्टद्युम्न तथा द्रोणाचार्यका पराक्रम   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 77: भीमसेन, धृष्टद्युम्न तथा द्रोणाचार्यका पराक्रम  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  6.77.27 
न हि मे जीवितेनापि विद्यतेऽद्य प्रयोजनम्।
भीमसेनं रणे हित्वा स्नेहमुत्सृज्य पाण्डवै:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
सारथि! भीमसेन को युद्धभूमि में छोड़कर तथा पाण्डवों से मोह भंग करके अब मेरे जीवन का कोई उपयोग नहीं है॥ 27॥
 
Charioteer! Having left Bhimasena on the battlefield and having broken my attachment with the Pandavas, my life has no further use.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)