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mahabharat 6.77.20: गहरी साँस लेते और आँसू बहाते हुए उसने रुँधे हुए कण्ठ से पूछा- ‘विशोक! मेरे प्राणों से भी अधिक प्रिय भीमसेन कहाँ हैं?’ ऐसा कहते-कहते वह अत्यन्त दुःखी हो गया।   |   mahabharat अध्याय 6.77: भीमसेन, धृष्टद्युम्न तथा द्रोणाचार्यका पराक्रम   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 77: भीमसेन, धृष्टद्युम्न तथा द्रोणाचार्यका पराक्रम  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  6.77.20 
अपृच्छद् वाष्पसंरुद्धो नि:श्वसन् वाचमीरयन्।
मम प्राणै: प्रियतम: क्व भीम इति दु:खित:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
गहरी साँस लेते और आँसू बहाते हुए उसने रुँधे हुए कण्ठ से पूछा- ‘विशोक! मेरे प्राणों से भी अधिक प्रिय भीमसेन कहाँ हैं?’ ऐसा कहते-कहते वह अत्यन्त दुःखी हो गया।
 
Taking deep breaths and shedding tears, he asked with a choked voice - 'Vishok! Where is Bhimasena, who is dearer to me than my life?' While saying this he became very sad.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)