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mahabharat 6.77.1-2: संजय कहते हैं - हे राजन! आप अपने ही दोष के कारण इस संकट में पड़े हैं। हे भरतश्रेष्ठ! आप धर्म और अधर्म के संयोग से उत्पन्न दोषों को देख सकते थे, किन्तु दुर्योधन उन्हें नहीं देख सका। प्रजानाथ! जुए की घटना आपके अपराध से पहले घटित हुई थी।   |   mahabharat अध्याय 6.77: भीमसेन, धृष्टद्युम्न तथा द्रोणाचार्यका पराक्रम   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 77: भीमसेन, धृष्टद्युम्न तथा द्रोणाचार्यका पराक्रम  »  श्लोक 1-2
 
 
श्लोक  6.77.1-2 
संजय उवाच
आत्मदोषात् त्वया राजन् प्राप्तं व्यसनमीदृशम्।
न हि दुर्योधनस्तानि पश्यते भरतर्षभ॥ १॥
यानि त्वं दृष्टवान् राजन् धर्मसंकरकारिते।
तव दोषात् पुरा वृत्तं द्यूतमेव विशाम्पते॥ २॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - हे राजन! आप अपने ही दोष के कारण इस संकट में पड़े हैं। हे भरतश्रेष्ठ! आप धर्म और अधर्म के संयोग से उत्पन्न दोषों को देख सकते थे, किन्तु दुर्योधन उन्हें नहीं देख सका। प्रजानाथ! जुए की घटना आपके अपराध से पहले घटित हुई थी।
 
Sanjaya says - O King! You have got into this trouble because of your own fault. O best of the Bharatas! You could see the faults that were born out of the combination of Dharma and Adharma, but Duryodhan could not see them. Prajanath! The incident of gambling had taken place before your crime.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)