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mahabharat 6.76.5-6: ये सैनिक युद्ध में प्रास, ऋष्टि, तोमर, लौह परिघ, भिन्दिपाल, शक्ति, मूसल, शाकपाण, चाप और कण्प आदि विचित्र अस्त्रों का प्रयोग करने की कला में निपुण हैं, जिनका प्रयोग दूसरों पर भी किया जा सकता है और ये मुष्टियुद्ध में भी हर प्रकार से समर्थ हैं ॥5-6॥   |   mahabharat अध्याय 6.76: धृतराष्ट्रकी चिन्ता   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 76: धृतराष्ट्रकी चिन्ता  »  श्लोक 5-6
 
 
श्लोक  6.76.5-6 
प्रासर्ष्टितोमरेष्वाजौ परिघेष्वायसेषु च।
भिन्दिपालेषु शक्तीषु मुसलेषु च सर्वश:॥ ५॥
कम्पनेषु च चापेषु कणपेषु च सर्वश:।
क्षेपणीयेषु चित्रेषु मुष्टियुद्धेषु च क्षमम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
ये सैनिक युद्ध में प्रास, ऋष्टि, तोमर, लौह परिघ, भिन्दिपाल, शक्ति, मूसल, शाकपाण, चाप और कण्प आदि विचित्र अस्त्रों का प्रयोग करने की कला में निपुण हैं, जिनका प्रयोग दूसरों पर भी किया जा सकता है और ये मुष्टियुद्ध में भी हर प्रकार से समर्थ हैं ॥5-6॥
 
These soldiers are skilled in the art of using strange weapons in war like Pras, Rishti, Tomar, Iron Parigh, Bhindipal, Shakti, Musal, Shakpan, Arc and Kanap etc. which can be used on others and are also capable in every way in fist fighting. 5-6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)