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श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 76: धृतराष्ट्रकी चिन्ता  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  6.76.26 
अथवा भाव्यमेवं हि संजयैतेन सर्वथा।
पुरा धात्रा यथा सृष्टं तत् तथा नैतदन्यथा॥ २६॥
 
 
अनुवाद
संजय! या ​​तो सब प्रकार से ऐसा ही होने वाला था। विधाता ने जो कुछ पहले से ही रचा है, वह उसी रूप में घटित होता है, उसे कोई बदल नहीं सकता॥26॥
 
Sanjay! Or it was going to happen like this in every way. Whatever the creator has already created, happens in that form, no one can change it.॥ 26॥
 
इति श्रीमहाभारते भीष्मपर्वणि भीष्मवधपर्वणि धृतराष्ट्रचिन्तायां षट्सप्ततितमोऽध्याय:॥ ७६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत भीष्मपर्वके अन्तर्गत भीष्मवधपर्वमें धृतराष्ट्रकी चिन्ताविषयक छिहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ७६॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)