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mahabharat 6.76.17-19: मेरी सेना सदैव द्रोणाचार्य, भीष्म, कृतवर्मा, कृपाचार्य, दु:शासन, जयद्रथ, भगदत्त, विकर्ण, अश्वत्थामा, शकुनि और बाह्लीक आदि श्रेष्ठ योद्धाओं तथा अन्य पराक्रमी एवं महामनस्वी लोगों द्वारा सुरक्षित रहती है। यदि ऐसी सेना भी युद्ध में मारी जाती है, तो उसका कारण हमारा प्राचीन प्रारब्ध ही है॥17-19॥   |   mahabharat अध्याय 6.76: धृतराष्ट्रकी चिन्ता   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 76: धृतराष्ट्रकी चिन्ता  »  श्लोक 17-19
 
 
श्लोक  6.76.17-19 
द्रोणभीष्माभिसंगुप्तं गुप्तं च कृतवर्मणा॥ १७॥
कृपदु:शासनाभ्यां च जयद्रथमुखैस्तथा।
भगदत्तविकर्णाभ्यां द्रौणिसौबलबाह्लिकै:॥ १८॥
गुप्तं प्रवीरैर्लोकैश्च सारवद्भिर्महात्मभि:।
यदहन्यत संग्रामे दैवमत्र पुरातनम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
मेरी सेना सदैव द्रोणाचार्य, भीष्म, कृतवर्मा, कृपाचार्य, दु:शासन, जयद्रथ, भगदत्त, विकर्ण, अश्वत्थामा, शकुनि और बाह्लीक आदि श्रेष्ठ योद्धाओं तथा अन्य पराक्रमी एवं महामनस्वी लोगों द्वारा सुरक्षित रहती है। यदि ऐसी सेना भी युद्ध में मारी जाती है, तो उसका कारण हमारा प्राचीन प्रारब्ध ही है॥17-19॥
 
My army is always protected by the prominent warriors like Dronacharya, Bhishma, Kritavarma, Kripacharya, Dushasan, Jayadratha, Bhagadatta, Vikarna, Ashwatthama, Shakuni and Bahlika and other powerful and great-minded people. If even such an army is killed in the war, then the reason for it is our ancient destiny.॥17-19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)