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mahabharat 6.76.12: हे प्रिये! यह सेना उन प्रधान स्वजनों द्वारा पोषित है, जिनके कर्म और आचरण अनेक बार देखे जा चुके हैं और जो जगत के रक्षकों के समान शक्तिशाली हैं। यह सम्पूर्ण जगत में प्रसिद्ध है॥12॥   |   mahabharat अध्याय 6.76: धृतराष्ट्रकी चिन्ता   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 76: धृतराष्ट्रकी चिन्ता  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  6.76.12 
स्वजनैस्तु नरैर्मुख्यैर्बहुशो दृष्टकर्मभि:।
लोकपालोपमैस्तात पालितं लोकविश्रुतम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
हे प्रिये! यह सेना उन प्रधान स्वजनों द्वारा पोषित है, जिनके कर्म और आचरण अनेक बार देखे जा चुके हैं और जो जगत के रक्षकों के समान शक्तिशाली हैं। यह सम्पूर्ण जगत में प्रसिद्ध है॥12॥
 
O dear! This army is maintained by the chief relatives whose deeds and behaviour have been observed many times, and who are as powerful as the protectors of the world. It is famous in the entire world.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)