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mahabharat 6.75.5: महाराज! कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर की यह बात सुनकर श्रेष्ठ सारथि धृष्टद्युम्न ने अपने सब सारथियों को मकरव्यूह बनाने का आदेश दिया॥5॥   |   mahabharat अध्याय 6.75: छठे दिनके युद्धका आरम्भ, पाण्डव तथा कौरव-सेनाका क्रमश: मकरव्यूह एवं क्रौंचव्यूह बनाकर युद्धमें प्रवृत्त होना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 75: छठे दिनके युद्धका आरम्भ, पाण्डव तथा कौरव-सेनाका क्रमश: मकरव्यूह एवं क्रौंचव्यूह बनाकर युद्धमें प्रवृत्त होना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  6.75.5 
एवमुक्तस्तु पार्थेन धृष्टद्युम्नो महारथ:।
व्यादिदेश महाराज रथिनो रथिनां वर:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
महाराज! कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर की यह बात सुनकर श्रेष्ठ सारथि धृष्टद्युम्न ने अपने सब सारथियों को मकरव्यूह बनाने का आदेश दिया॥5॥
 
Maharaj! On hearing this from Kunti's son Yudhishthira, Dhrishtadyumna, the best charioteer, ordered all his charioteers to form a Makarvyuh. 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)