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mahabharat 6.75.32: तब पराक्रमी द्रोणाचार्य ने स्वयं घोड़ों को अपने नियंत्रण में ले लिया और पांडव सेना को नष्ट करना शुरू कर दिया, जैसे आग कपास के ढेर को जला देती है।   |   mahabharat अध्याय 6.75: छठे दिनके युद्धका आरम्भ, पाण्डव तथा कौरव-सेनाका क्रमश: मकरव्यूह एवं क्रौंचव्यूह बनाकर युद्धमें प्रवृत्त होना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 75: छठे दिनके युद्धका आरम्भ, पाण्डव तथा कौरव-सेनाका क्रमश: मकरव्यूह एवं क्रौंचव्यूह बनाकर युद्धमें प्रवृत्त होना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  6.75.32 
स संगृह्य स्वयं वाहान् भारद्वाज: प्रतापवान्।
व्यधमत् पाण्डवीं सेनां तूलराशिमिवानल:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
तब पराक्रमी द्रोणाचार्य ने स्वयं घोड़ों को अपने नियंत्रण में ले लिया और पांडव सेना को नष्ट करना शुरू कर दिया, जैसे आग कपास के ढेर को जला देती है।
 
Then the mighty Dronacharya himself took control of the horses and began to destroy the Pandava army just as fire consumes a heap of cotton.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)