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mahabharat 6.75.22: मरिष! श्रुतायु, शतायु और सोमदत्तकुमार भूरिश्रवा - ये सब एक दूसरे की रक्षा करते हुए व्यूह के जघन प्रदेश में स्थित थे ॥22॥   |   mahabharat अध्याय 6.75: छठे दिनके युद्धका आरम्भ, पाण्डव तथा कौरव-सेनाका क्रमश: मकरव्यूह एवं क्रौंचव्यूह बनाकर युद्धमें प्रवृत्त होना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 75: छठे दिनके युद्धका आरम्भ, पाण्डव तथा कौरव-सेनाका क्रमश: मकरव्यूह एवं क्रौंचव्यूह बनाकर युद्धमें प्रवृत्त होना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  6.75.22 
श्रुतायुश्च शतायुश्च सौमदत्तिश्च मारिष।
व्यूहस्य जघने तस्थू रक्षमाणा: परस्परम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
मरिष! श्रुतायु, शतायु और सोमदत्तकुमार भूरिश्रवा - ये सब एक दूसरे की रक्षा करते हुए व्यूह के जघन प्रदेश में स्थित थे ॥22॥
 
Marish! Shrutayu, Shatayu and Somadattakumar Bhurishrava - they were situated in the pubic region of the array, protecting each other. 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)