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mahabharat 6.74.12-13: सात्यकि के दस बड़े पराक्रमी पुत्र थे। उनके कवच, आयुध और ध्वजाएँ सब अद्वितीय थीं। वे सब महारथी कहलाते थे। युद्धस्थल में यूप से अंकित ध्वजा लिए हुए महारथी भूरिश्रवा को देखकर वे उसके पास आए और उससे बड़े क्रोध से इस प्रकार बोले -॥12-13॥   |   mahabharat अध्याय 6.74: सात्यकि और भूरिश्रवाका युद्ध, भूरिश्रवाद्वारा सात्यकिके दस पुत्रोंका वध, अर्जुनका पराक्रम तथा पाँचवें दिनके युद्धका उपसंहार   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 74: सात्यकि और भूरिश्रवाका युद्ध, भूरिश्रवाद्वारा सात्यकिके दस पुत्रोंका वध, अर्जुनका पराक्रम तथा पाँचवें दिनके युद्धका उपसंहार  »  श्लोक 12-13
 
 
श्लोक  6.74.12-13 
तं दृष्ट्वा युयुधानस्य सुता दश महाबला:।
महारथा: समाख्याताश्चित्रवर्मायुधध्वजा:॥ १२॥
समासाद्य महेष्वासं भूरिश्रवसमाहवे।
ऊचु: सर्वे सुसंरब्धा यूपकेतुं महारणे॥ १३॥
 
 
अनुवाद
सात्यकि के दस बड़े पराक्रमी पुत्र थे। उनके कवच, आयुध और ध्वजाएँ सब अद्वितीय थीं। वे सब महारथी कहलाते थे। युद्धस्थल में यूप से अंकित ध्वजा लिए हुए महारथी भूरिश्रवा को देखकर वे उसके पास आए और उससे बड़े क्रोध से इस प्रकार बोले -॥12-13॥
 
Satyaki had ten very powerful sons. Their armour, weapons and flags were all unique. All of them were called great warriors. Seeing the great warrior Bhurishrava with a flag marked with a yup in the battlefield, they came to him and spoke to him with great anger in this manner -॥12-13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)