Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.73.7-9: तब श्रीकृष्ण सहित अर्जुन ने विचार करके और बार-बार दीर्घ गर्म श्वास लेकर अपने बाएं हाथ से धनुष पर दबाव डाला। तब गांडीवधारी और शत्रुओं का संहार करने वाले पार्थ ने क्रोधित होकर हाथ में मुड़ी हुई गांठों वाले कुछ भयंकर बाण ले लिए, जो जीवन का अंत करने वाले थे। बलवानों में श्रेष्ठ अर्जुन ने उन बाणों से युद्धस्थल में अश्वत्थामा को तत्काल घायल कर दिया। | mahabharat अध्याय 6.73: विराट-भीष्म, अश्वत्थामा-अर्जुन, दुर्योधन-भीमसेन तथा अभिमन्यु और लक्ष्मणके द्वन्द्व-युद्ध । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तब श्रीकृष्ण सहित अर्जुन ने विचार करके और बार-बार दीर्घ गर्म श्वास लेकर अपने बाएं हाथ से धनुष पर दबाव डाला। तब गांडीवधारी और शत्रुओं का संहार करने वाले पार्थ ने क्रोधित होकर हाथ में मुड़ी हुई गांठों वाले कुछ भयंकर बाण ले लिए, जो जीवन का अंत करने वाले थे। बलवानों में श्रेष्ठ अर्जुन ने उन बाणों से युद्धस्थल में अश्वत्थामा को तत्काल घायल कर दिया।
Then Arjuna, along with Shri Krishna, after thinking and drawing long hot breaths again and again, pressed the bow with his left hand. Then Partha, the bearer of Gandiva and the slayer of enemies, became enraged and took some fierce arrows with bent knots in his hand, which were going to put an end to life. Arjuna, the best among the strong, immediately wounded Ashwatthama in the battlefield with those arrows. 7-9.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥