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mahabharat 6.73.28-29: इसके अतिरिक्त उन्होंने चित्रसेन का कवच भी भेदकर उसकी छाती में बाण मारा। तत्पश्चात् आपके वीर एवं पराक्रमी राजकुमार युद्धभूमि में एकत्र हुए और क्रोध में भरकर अभिमन्यु को तीखे बाणों से घायल करने लगे; किन्तु श्रेष्ठ अस्त्रों के स्वामी अभिमन्यु ने अपने तीखे बाणों से उन सबको घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 6.73: विराट-भीष्म, अश्वत्थामा-अर्जुन, दुर्योधन-भीमसेन तथा अभिमन्यु और लक्ष्मणके द्वन्द्व-युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 73: विराट-भीष्म, अश्वत्थामा-अर्जुन, दुर्योधन-भीमसेन तथा अभिमन्यु और लक्ष्मणके द्वन्द्व-युद्ध  »  श्लोक 28-29
 
 
श्लोक  6.73.28-29 
भित्त्वा चास्य तनुत्राणं शरेणोरस्यताडयत्।
ततस्ते तावका वीरा राजपुत्रा महारथा:॥ २८॥
समेत्य युधि संरब्धा विव्यधुर्निशितै: शरै:।
तांश्च सर्वान् शरैस्तीक्ष्णैर्जघान परमास्त्रवित्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
इसके अतिरिक्त उन्होंने चित्रसेन का कवच भी भेदकर उसकी छाती में बाण मारा। तत्पश्चात् आपके वीर एवं पराक्रमी राजकुमार युद्धभूमि में एकत्र हुए और क्रोध में भरकर अभिमन्यु को तीखे बाणों से घायल करने लगे; किन्तु श्रेष्ठ अस्त्रों के स्वामी अभिमन्यु ने अपने तीखे बाणों से उन सबको घायल कर दिया।
 
Also, he pierced Chitrasena's armour and shot an arrow into his chest. Thereafter, your brave and mighty princes gathered in the battlefield and filled with anger began to pierce Abhimanyu with sharp arrows; but Abhimanyu, the master of the best weapons, wounded them all with his sharp arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)