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mahabharat 6.73.20: दुर्योधन की छाती पर स्वर्ण-सूत्र में पिरोई हुई मणि शोभा पा रही थी। भीमसेन के बाणों से आवृत होकर वह ऐसी शोभा पा रही थी, जैसे आकाश में ग्रहों से घिरा हुआ सूर्य शोभा पाता है। 20॥   |   mahabharat अध्याय 6.73: विराट-भीष्म, अश्वत्थामा-अर्जुन, दुर्योधन-भीमसेन तथा अभिमन्यु और लक्ष्मणके द्वन्द्व-युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 73: विराट-भीष्म, अश्वत्थामा-अर्जुन, दुर्योधन-भीमसेन तथा अभिमन्यु और लक्ष्मणके द्वन्द्व-युद्ध  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  6.73.20 
तस्य काञ्चनसूत्रस्थ: शरै: संछादितो मणि:।
रराजोरसि खे सूर्यो ग्रहैरिव समावृत:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
दुर्योधन की छाती पर स्वर्ण-सूत्र में पिरोई हुई मणि शोभा पा रही थी। भीमसेन के बाणों से आवृत होकर वह ऐसी शोभा पा रही थी, जैसे आकाश में ग्रहों से घिरा हुआ सूर्य शोभा पाता है। 20॥
 
Duryodhana's chest was graced by a gem, which was threaded in a golden thread. Covered by the arrows of Bhimasena, she became beautiful just like the sun surrounded by planets in the sky becomes beautiful. 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)