Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 6.72.13-14: ध्वजाएँ और पताकाएँ फहराते हुए बहुत से रथ, जिनका प्रत्येक भाग सुवर्ण से मढ़ा हुआ, अत्यंत सुंदर और व्याघ्रचर्म से आच्छादित था, युद्धभूमि में चलते हुए शोभायमान हो रहे थे। पराक्रमी योद्धा परस्पर युद्ध करने और एक-दूसरे पर विजय प्राप्त करने की इच्छा रखते हुए सिंहों के समान गर्जना कर रहे थे और उनकी गर्जना सर्वत्र गूंज रही थी॥13-14॥   |   mahabharat अध्याय 6.72: दोनों सेनाओंका परस्पर घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 72: दोनों सेनाओंका परस्पर घोर युद्ध  »  श्लोक 13-14
 
 
श्लोक  6.72.13-14 
ध्वजिनो हेमचित्राङ्गा विचरन्तो रणाजिरे।
सपताका रथा रेजुर्वैयाघ्रपरिवारणा:॥ १३॥
समेतानां च समरे जिगीषूणां परस्परम्।
बभूव तुमुल: शब्द: सिंहानामिव नर्दताम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
ध्वजाएँ और पताकाएँ फहराते हुए बहुत से रथ, जिनका प्रत्येक भाग सुवर्ण से मढ़ा हुआ, अत्यंत सुंदर और व्याघ्रचर्म से आच्छादित था, युद्धभूमि में चलते हुए शोभायमान हो रहे थे। पराक्रमी योद्धा परस्पर युद्ध करने और एक-दूसरे पर विजय प्राप्त करने की इच्छा रखते हुए सिंहों के समान गर्जना कर रहे थे और उनकी गर्जना सर्वत्र गूंज रही थी॥13-14॥
 
Many chariots with flags and banners fluttering on them, each part of which was adorned with gold and looked very beautiful and covered with tiger skin, were looking beautiful while moving in the battlefield. The valiant warriors, desirous of fighting each other and achieving victory over each other, were roaring like lions and their tumultuous sound was resonating everywhere.॥13-14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)