श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 71: भीष्म, अर्जुन आदि योद्धाओंका घमासान युद्ध  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  6.71.30 
आर्षभाणि विचित्राणि रुक्मजालावृतानि च।
सम्पेतुर्दिक्षु सर्वासु चर्माणि भरतर्षभ॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
हे भारतभूषण! सोने की जाली से मढ़ी हुई तथा बैल की खाल से बनी हुई विचित्र ढालें ​​सब दिशाओं में गिर रही थीं।
 
O Bharatbhushan! Strange shields covered with gold netting and made of bull's skin were falling in all directions. 30.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)