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mahabharat 6.7.8: वहाँ स्त्री-पुरुष के जोड़े भी जन्म लेते हैं। स्त्रियाँ अप्सराओं के समान सुन्दर होती हैं। उत्तरकुरु के निवासी क्षीरी वृक्षों का अमृतमय दूध पीते हैं। 8.   |   mahabharat अध्याय 6.7: उत्तर कुरु, भद्राश्ववर्ष तथा माल्यवान‍्का वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 7: उत्तर कुरु, भद्राश्ववर्ष तथा माल्यवान‍्का वर्णन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  6.7.8 
मिथुनानि च जायन्ते स्त्रियश्चाप्सरसोपमा:।
तेषां ते क्षीरिणां क्षीरं पिबन्त्यमृतसंनिभम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
वहाँ स्त्री-पुरुष के जोड़े भी जन्म लेते हैं। स्त्रियाँ अप्सराओं के समान सुन्दर होती हैं। उत्तरकुरु के निवासी क्षीरी वृक्षों का अमृतमय दूध पीते हैं। 8.
 
Couples of men and women are also born there. The women are as beautiful as Apsaras. The residents of Uttarkuru drink the nectar-like milk of the Ksheeri trees. 8.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)