Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 6.7.4-5: हे मनुष्यों के स्वामी! वहाँ कुछ वृक्ष ऐसे हैं जो समस्त मनोवांछित फल प्रदान करते हैं। हे राजन! वहाँ क्षीरी नाम के कुछ और वृक्ष हैं जिनसे सदैव छः प्रकार के रसों से युक्त और अमृत के समान स्वादिष्ट दूध बहता रहता है। उनके फलों से इच्छानुसार वस्त्र और आभूषण भी प्रकट होते हैं। ॥4-5॥   |   mahabharat अध्याय 6.7: उत्तर कुरु, भद्राश्ववर्ष तथा माल्यवान‍्का वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 7: उत्तर कुरु, भद्राश्ववर्ष तथा माल्यवान‍्का वर्णन  »  श्लोक 4-5
 
 
श्लोक  6.7.4-5 
सर्वकामफलास्तत्र केचिद् वृक्षा जनाधिप।
अपरे क्षीरिणो नाम वृक्षास्तत्र नराधिप॥ ४॥
ये क्षरन्ति सदा क्षीरं षड्रसं चामृतोपमम्।
वस्त्राणि च प्रसूयन्ते फलेष्वाभरणानि च॥ ५॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! वहाँ कुछ वृक्ष ऐसे हैं जो समस्त मनोवांछित फल प्रदान करते हैं। हे राजन! वहाँ क्षीरी नाम के कुछ और वृक्ष हैं जिनसे सदैव छः प्रकार के रसों से युक्त और अमृत के समान स्वादिष्ट दूध बहता रहता है। उनके फलों से इच्छानुसार वस्त्र और आभूषण भी प्रकट होते हैं। ॥4-5॥
 
O Lord of men! There are some trees there which give all the desired fruits. O King! There are other trees named Ksheeri which always flow milk which is full of six kinds of juices and is as tasty as nectar. Clothes and ornaments also appear from their fruits as per the wish. ॥ 4-5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)