श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 7: उत्तर कुरु, भद्राश्ववर्ष तथा माल्यवान‍्का वर्णन  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  6.7.32 
षष्टिं वर्षसहस्राणि षष्टिमेव शतानि च।
आदित्यतापतप्तास्ते विशन्ति शशिमण्डलम्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
वे छियासठ हजार वर्षों तक सूर्यदेव की गर्मी में झुलसने के बाद अंततः चन्द्रमा में प्रवेश करते हैं।
 
They after being scorched in the heat of the Sun god for sixty-six thousand years, finally enter the moon.
 
इति श्रीमहाभारते भीष्मपर्वणि जम्बूखण्डविनिर्माणपर्वणि माल्यवद्वर्णने सप्तमोऽध्याय:॥ ७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत भीष्मपर्वके अन्तर्गत जम्बूखण्डविनिर्माणपर्वमें माल्यवान‍्का वर्णनविषयक सातवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ७॥

 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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