श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 7: उत्तर कुरु, भद्राश्ववर्ष तथा माल्यवान‍्का वर्णन  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  6.7.25 
तत्र तेषां मन:शान्तिर्न पिपासा जनाधिप।
तस्मिन् फलरसे पीते न जरा बाधते च तान्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
राजा! उस फल का रस पीने से उस स्थान के निवासियों के मन में पूर्ण शांति और प्रसन्नता रहती है। उन्हें कभी प्यास या बुढ़ापा नहीं सताता॥ 25॥
 
King! After drinking that fruit juice, the residents of that place have complete peace and happiness in their minds. They are never troubled by thirst or old age.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)