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mahabharat 6.7.15: महाराज! यह कालम् वृक्ष अत्यंत सुन्दर है और एक योजन ऊँचा है। इसमें सदैव पुष्प और फल लगते रहते हैं। सिद्ध और चारण सदैव इसका सेवन करते हैं॥ 15॥   |   mahabharat अध्याय 6.7: उत्तर कुरु, भद्राश्ववर्ष तथा माल्यवान‍्का वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 7: उत्तर कुरु, भद्राश्ववर्ष तथा माल्यवान‍्का वर्णन  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  6.7.15 
कालाम्रस्तु महाराज नित्यपुष्पफल: शुभ:।
द्रुमश्च योजनोत्सेध: सिद्धचारणसेवित:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
महाराज! यह कालम् वृक्ष अत्यंत सुन्दर है और एक योजन ऊँचा है। इसमें सदैव पुष्प और फल लगते रहते हैं। सिद्ध और चारण सदैव इसका सेवन करते हैं॥ 15॥
 
Maharaj! The Kalamra tree is very beautiful and is one yojana high. It always bears flowers and fruits. Siddhas and Charanas always consume it.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)