श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 7: उत्तर कुरु, भद्राश्ववर्ष तथा माल्यवान‍्का वर्णन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  6.7.1 
धृतराष्ट्र उवाच
मेरोरथोत्तरं पार्श्वं पूर्वं चाचक्ष्व संजय।
निखिलेन महाबुद्धे माल्यवन्तं च पर्वतम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र बोले - हे बुद्धिमान संजय! मेरे उत्तर और पूर्वभाग में जो कुछ है, उसका तुम पूर्णतः वर्णन करो। साथ ही माल्यवान पर्वत के विषय में जानने योग्य बातें भी बताओ।
 
Dhritarashtra said – Most intelligent Sanjay! You should completely describe whatever is there in my answer and previous part. Also tell me the things worth knowing about Malyavan Mountain. 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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