श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 69: कौरवोंद्वारा मकरव्यूह तथा पाण्डवोंद्वारा श्येनव्यूहका निर्माण एवं पाँचवें दिनके युद्धका आरम्भ  »  श्लोक d5
 
 
श्लोक  6.69.d5 
द्रोण उवाच
बालिशस्त्वं न जानीषे पाण्डवानां पराक्रमम्।
न शक्या हि यथा जेतुं पाण्डवा हि महाबला:॥
यथाबलं यथावीर्यं कर्म कुर्यामहं हि ते।
 
 
अनुवाद
द्रोणाचार्य बोले- तुम भोले हो। तुम नहीं जानते कि पांडव कितने शक्तिशाली हैं। युद्ध में पराक्रमी पांडवों को हराना असंभव है, फिर भी मैं अपने बल और पराक्रम के अनुसार तुम्हारा काम कर सकता हूँ।
 
Dronacharya said- You are naive. You do not know how powerful the Pandavas are. It is impossible to defeat the mighty Pandavas in battle, however, I can do your job according to my strength and bravery.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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