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श्लोक 6.69.34  |
तद् युद्धमभवद् घोरं देवानां दानवैरिव।
जयमाकाङ्क्षतां संख्ये यशश्च सुमहाद्भुतम्॥ ३४॥ |
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| अनुवाद |
| उस युद्ध में विजय और महान यश की इच्छा रखने वाले पाण्डवों ने कौरवों के साथ उसी प्रकार भयंकर युद्ध किया, जैसे देवता दैत्यों के साथ लड़ते थे। |
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| In that war, the Pandavas, who desired victory and great fame, fought a fierce battle with the Kauravas, just as the gods fought with the demons. |
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इति श्रीमहाभारते भीष्मपर्वणि भीष्मवधपर्वणि पञ्चम दिवसयुद्धारम्भे एकोनसप्ततितमोऽध्याय:॥ ६९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत भीष्मपर्वके अन्तर्गत भीष्मवधपर्वमें पाँचवें दिवसके युद्धका आरम्भविषयक उनहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ६९॥
[दाक्षिणात्य अधिक पाठके ५ १/२ श्लोक मिलाकर कुल ३९ १/२ श्लोक हैं।] |
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