श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 69: कौरवोंद्वारा मकरव्यूह तथा पाण्डवोंद्वारा श्येनव्यूहका निर्माण एवं पाँचवें दिनके युद्धका आरम्भ  »  श्लोक 17-18
 
 
श्लोक  6.69.17-18 
ततो दुर्योधनो राजा भारद्वाजमभाषत।
पूर्वं दृष्ट्वा वधं घोरं बलस्य बलिनां वर:॥ १७॥
भ्रातॄणां च वधं युद्धे स्मरमाणो महारथ:।
आचार्य सततं हि त्वं हितकामो ममानघ॥ १८॥
 
 
अनुवाद
तब समस्त बलवानों में श्रेष्ठ राजा दुर्योधन ने युद्ध में अपनी सेना का भयंकर विनाश तथा अपने भाइयों का वध हुआ, यह सोचकर भरद्वाजनंदन द्रोणाचार्य से कहा - 'निष्पाप गुरुवर! आप सदैव मेरा कल्याण चाहते हैं।॥ 17-18॥
 
Then King Duryodhana, the greatest warrior amongst all the strong, keeping in mind the terrible destruction of his army and the killing of his brothers in the war, said to Bharadvajanandan Dronacharya - 'Innocent teacher! You always wish well for me.॥ 17-18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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