श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 68: ब्रह्मभूतस्तोत्र तथा श्रीकृष्ण और अर्जुनकी महत्ता  »  श्लोक 15-16
 
 
श्लोक  6.68.15-16 
यदर्थं नृषु सम्भूतौ नरनारायणावृषी॥ १५॥
अवध्यौ च यथा वीरौ संयुगेष्वपराजितौ।
यथा च पाण्डवा राजन्नवध्या युधि कस्यचित्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
तुमने भलीभाँति सुन लिया है कि नर और नारायण ऋषि किस उद्देश्य से मनुष्यों में अवतरित हुए थे, किस प्रकार वे दोनों अपराजित वीर युद्ध में अजेय हैं और किस प्रकार समस्त पाण्डव रणभूमि में किसी के द्वारा मारे नहीं जा सकते ॥ 15-16॥
 
You have heard very well about the purpose for which the sages Nara and Narayana were incarnated among humans, how those two undefeated heroes are invincible in war and how all the Pandavas are not to be killed by anyone on the battlefield.॥ 15-16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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