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mahabharat 6.67.25: हे भरतवंशी महाराज! यह बात अच्छी तरह समझकर राजा युधिष्ठिर ने मन ही मन योगेश्वर, सर्वशक्तिमान, जगत् के ईश्वर और महात्मा भगवान केशव की शरण ली॥25॥   |   mahabharat अध्याय 6.67: भगवान‍् श्रीकृष्णकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 67: भगवान‍् श्रीकृष्णकी महिमा  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  6.67.25 
स तं युधिष्ठिरो ज्ञात्वा याथातथ्येन भारत।
सर्वात्मना महात्मानं केशवं जगदीश्वरम्।
प्रपन्न: शरणं राजन् योगानां प्रभुमीश्वरम्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
हे भरतवंशी महाराज! यह बात अच्छी तरह समझकर राजा युधिष्ठिर ने मन ही मन योगेश्वर, सर्वशक्तिमान, जगत् के ईश्वर और महात्मा भगवान केशव की शरण ली॥25॥
 
Bharatvanshi king! Understanding this very well, King Yudhishthir wholeheartedly took refuge in Lord Keshav, the Lord of Yoga, the Almighty, the God of the World and the Mahatma. 25॥
 
इति श्रीमहाभारते भीष्मपर्वणि भीष्मवधपर्वणि विश्वोपाख्याने सप्तषष्टितमोऽध्याय:॥ ६७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत भीष्मपर्वके अन्तर्गत भीष्मवधपर्वमें विश्वोपाख्यानविषयक सरसठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ६७॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)