परं हि पुण्डरीकाक्षान्न भूतं न भविष्यति।
मुखत: सोऽसृजद् विप्रान् बाहुभ्यां क्षत्रियांस्तथा॥ १८॥
वैश्यांश्चाप्यूरुतो राजन् शूद्रान् वै पादतस्तथा।
अनुवाद
इन कमल-नेत्र भगवान से बढ़कर न तो कभी कोई हुआ है और न ही कभी होगा। हे राजन! इन्होंने अपने मुख से ब्राह्मणों को, अपनी भुजाओं से क्षत्रियों को, अपनी जंघाओं से वैश्यों को और अपने चरणों से शूद्रों को उत्पन्न किया है।
There has never been, nor will there ever be, any being greater than this lotus-eyed Lord. O King! He has created Brahmins from his mouth, Kshatriyas from his arms, Vaishyas from his thighs and Shudras from his feet.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥