Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.67.14-15: ब्राह्मणों को ध्यान के द्वारा इन परम तेजस्वी वासुदेव का ज्ञान प्राप्त होता है। जल में लेटे हुए नारायण के कानों के मैल से महाबली मधु नामक दैत्य उत्पन्न हुआ। वह मधु अत्यंत उग्र स्वभाव का और क्रूर था। उसने ब्रह्माजी का सम्मान करते हुए अत्यंत भयानक बुद्धि धारण कर ली थी। इसलिए भगवान पुरुषोत्तम ने ब्रह्माजी का सम्मान करते हुए मधु का वध कर दिया। | mahabharat अध्याय 6.67: भगवान् श्रीकृष्णकी महिमा । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ब्राह्मणों को ध्यान के द्वारा इन परम तेजस्वी वासुदेव का ज्ञान प्राप्त होता है। जल में लेटे हुए नारायण के कानों के मैल से महाबली मधु नामक दैत्य उत्पन्न हुआ। वह मधु अत्यंत उग्र स्वभाव का और क्रूर था। उसने ब्रह्माजी का सम्मान करते हुए अत्यंत भयानक बुद्धि धारण कर ली थी। इसलिए भगवान पुरुषोत्तम ने ब्रह्माजी का सम्मान करते हुए मधु का वध कर दिया।
Brahmins gain the knowledge of this supremely illustrious Vasudeva through meditation. The great demon Madhu was born from the dirt in the ears of Narayan who was lying in the water. That Madhu was of a very fierce nature and was cruel. He had adopted a very terrifying intellect while respecting Brahmaji. Therefore, Lord Purushottam killed Madhu while respecting Brahmaji.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥