श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 66: नारायणावतार श्रीकृष्ण एवं नरावतार अर्जुनकी महिमाका प्रतिपादन  »  श्लोक 40-d2h
 
 
श्लोक  6.66.40-d2h 
द्वापरस्य युगस्यान्ते आदौ कलियुगस्य च।
सात्वतं विधिमास्थाय गीत: संकर्षणेन वै॥ ४०॥
(कृष्णेति नाम्ना विख्यात इमं लोकं स रक्षति।)
 
 
अनुवाद
द्वापरयुग के अन्त और कलियुग के प्रारम्भ में संकर्षण ने श्रीकृष्ण की पूजा की और उनकी महिमा का गान किया। वे ही श्रीकृष्ण नाम से विख्यात होकर इस जगत की रक्षा करते हैं॥40॥
 
At the end of Dwaparyuga and the beginning of Kaliyuga, Sankarshana adopted the method of worshipping Sri Krishna and sang His glories. He alone, known by the name of Sri Krishna, protects this world.॥ 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)