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mahabharat 6.66.39: शुभ लक्षणों से युक्त ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र - ये सभी अपने कर्मों द्वारा उनकी सेवा और पूजा में सदैव तत्पर रहते हैं ॥39॥   |   mahabharat अध्याय 6.66: नारायणावतार श्रीकृष्ण एवं नरावतार अर्जुनकी महिमाका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 66: नारायणावतार श्रीकृष्ण एवं नरावतार अर्जुनकी महिमाका प्रतिपादन  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  6.66.39 
ब्राह्मणै: क्षत्रियैर्वैश्यै: शूद्रैश्च कृतलक्षणै:।
सेव्यतेऽभ्यर्च्यते चैव नित्ययुक्तै: स्वकर्मभि:॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
शुभ लक्षणों से युक्त ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र - ये सभी अपने कर्मों द्वारा उनकी सेवा और पूजा में सदैव तत्पर रहते हैं ॥39॥
 
Brahmins, Kshatriyas, Vaishyas and Shudras with auspicious traits - all of them are always ready to serve and worship Him through their deeds. 39॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)