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mahabharat 6.66.37: वे पाण्डवों को सदैव शुभ बुद्धि प्रदान करते हैं, युद्ध में उन्हें बल प्रदान करते हैं और भय से उनकी सदैव रक्षा करते हैं ॥37॥   |   mahabharat अध्याय 6.66: नारायणावतार श्रीकृष्ण एवं नरावतार अर्जुनकी महिमाका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 66: नारायणावतार श्रीकृष्ण एवं नरावतार अर्जुनकी महिमाका प्रतिपादन  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  6.66.37 
श्रेयोयुक्तां सदा बुद्धिं पाण्डवानां दधाति य:।
बलं चैव रणे नित्यं भयेभ्यश्चैव रक्षति॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
वे पाण्डवों को सदैव शुभ बुद्धि प्रदान करते हैं, युद्ध में उन्हें बल प्रदान करते हैं और भय से उनकी सदैव रक्षा करते हैं ॥37॥
 
He always grants the Pandavas auspicious wisdom, gives them strength in battle and always protects them from fear. ॥ 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)