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mahabharat 6.66.32: तुम भगवान गोविन्द और पाण्डुनन्दन धनंजय से द्वेष करते हो। वे दोनों नर और नारायण देव हैं। तुम्हारे अतिरिक्त और कौन मनुष्य उनसे द्वेष कर सकता है? 32॥   |   mahabharat अध्याय 6.66: नारायणावतार श्रीकृष्ण एवं नरावतार अर्जुनकी महिमाका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 66: नारायणावतार श्रीकृष्ण एवं नरावतार अर्जुनकी महिमाका प्रतिपादन  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  6.66.32 
यस्माद् द्विषसि गोविन्दं पाण्डवं तं धनंजयम्।
नरनारायणौ देवौ कोऽन्यो द्विष्याद्धि मानव:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
तुम भगवान गोविन्द और पाण्डुनन्दन धनंजय से द्वेष करते हो। वे दोनों नर और नारायण देव हैं। तुम्हारे अतिरिक्त और कौन मनुष्य उनसे द्वेष कर सकता है? 32॥
 
You hate Lord Govind and Pandunandan Dhananjay. Both of them are Nara and Narayana Dev. Apart from you, which other person can hate them? 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)