Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.66.28-d1h: भरतकुलभूषण! इस विषय को सुनकर और समझकर मैं वासुदेवनन्दन भगवान श्रीकृष्ण को अविनाशी प्रभु, परमात्मा, लोकेश्वरेश्वर और सर्वशक्तिमान नारायण जानता हूँ॥28॥ | mahabharat अध्याय 6.66: नारायणावतार श्रीकृष्ण एवं नरावतार अर्जुनकी महिमाका प्रतिपादन । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एतमर्थं च विज्ञाय श्रुत्वा च प्रभुमव्ययम्।
वासुदेवं महात्मानं लोकानामीश्वरेश्वरम्॥ २८॥
(जानामि भरतश्रेष्ठ कृष्णं नारायणं प्रभुम्।)
अनुवाद
भरतकुलभूषण! इस विषय को सुनकर और समझकर मैं वासुदेवनन्दन भगवान श्रीकृष्ण को अविनाशी प्रभु, परमात्मा, लोकेश्वरेश्वर और सर्वशक्तिमान नारायण जानता हूँ॥28॥
Bharatkulbhushan! After hearing and understanding this topic, I know Vasudevanandan Lord Shri Krishna to be the imperishable Lord, the Supreme Soul, Lokeshwareshwar and the Almighty Narayan. 28॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥