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श्री महाभारत
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पर्व 6: भीष्म पर्व
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अध्याय 66: नारायणावतार श्रीकृष्ण एवं नरावतार अर्जुनकी महिमाका प्रतिपादन
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श्लोक 23
श्लोक
6.66.23
एवं विदित्वा तत्त्वार्थं लोकानामीश्वरेश्वर:।
वासुदेवो नमस्कार्य: सर्वलोकै: सुरोत्तमा:॥ २३॥
अनुवाद
सुरेशश्रेष्ठगण! इस प्रकार भौतिक पदार्थों को समझकर सभी देवताओं के स्वामी भगवान वासुदेव को नमस्कार करें॥23॥
Sureshresthagan! In this way, understanding the material things, everyone should offer namaskar to Lord Vasudev, the Lord of all gods. 23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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