श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 66: नारायणावतार श्रीकृष्ण एवं नरावतार अर्जुनकी महिमाका प्रतिपादन  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  6.66.20 
योगिनं तं महात्मानं प्रविष्टं मानुषीं तनुम्।
अवमन्येद् वासुदेवं तमाहुस्तामसं जना:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
भगवान वासुदेव ही परब्रह्म हैं और अपनी योगशक्ति के कारण ही उन्होंने मानव शरीर में प्रवेश किया है। जो उनका अनादर करता है, उसे बुद्धिमान लोग तामसी कहते हैं॥ 20॥
 
‘Lord Vasudeva is the Supreme Being and because of his yogic powers he has entered the human body. The wise call the one who disregards him as being in the mode of ignorance.॥ 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)