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श्लोक  6.66.2 
विदितं तात योगान्मे सर्वमेतत् तवेप्सितम्।
तथा तद् भवितेत्युक्त्वा तत्रैवान्तरधीयत॥ २॥
 
 
अनुवाद
पिताश्री! आपके मन में जो भी इच्छा है, उसे मैंने योगबल से जान लिया है। उसी के अनुसार सब कुछ होगा।' - ऐसा कहकर भगवान वहीं अन्तर्धान हो गए॥2॥
 
Father! Whatever desire you have in your mind, I have come to know it through the power of yoga. Everything will be done according to that.' - saying this, the Lord disappeared right there.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)