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mahabharat 6.66.19: जो सम्पूर्ण इन्द्रियों के स्वामी भगवान वासुदेव को केवल मनुष्य कहता है, वह मूर्ख है। वह पापी कहलाता है, क्योंकि वह भगवान की अवहेलना करता है॥19॥   |   mahabharat अध्याय 6.66: नारायणावतार श्रीकृष्ण एवं नरावतार अर्जुनकी महिमाका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 66: नारायणावतार श्रीकृष्ण एवं नरावतार अर्जुनकी महिमाका प्रतिपादन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  6.66.19 
यश्च मानुषमात्रोऽयमिति ब्रूयात् स मन्दधी:।
हृषीकेशमवज्ञानात् तमाहु: पुरुषाधमम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
जो सम्पूर्ण इन्द्रियों के स्वामी भगवान वासुदेव को केवल मनुष्य कहता है, वह मूर्ख है। वह पापी कहलाता है, क्योंकि वह भगवान की अवहेलना करता है॥19॥
 
He who calls Lord Vasudeva, the master of all the senses, a mere human being, is a fool. He is called a sinner because he disregards the Lord.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)