Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 6.66.18: अतः इन्द्र आदि समस्त देवताओं तथा संसार के मनुष्यों को यह समझकर कि ये मनुष्य हैं, असीम पराक्रमी भगवान वासुदेव की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए।   |   mahabharat अध्याय 6.66: नारायणावतार श्रीकृष्ण एवं नरावतार अर्जुनकी महिमाका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 66: नारायणावतार श्रीकृष्ण एवं नरावतार अर्जुनकी महिमाका प्रतिपादन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  6.66.18 
तस्मात् सेन्द्रै: सुरै: सर्वैर्लोकैश्चामितविक्रम:।
नावज्ञेयो वासुदेवो मानुषोऽयमिति प्रभु:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
अतः इन्द्र आदि समस्त देवताओं तथा संसार के मनुष्यों को यह समझकर कि ये मनुष्य हैं, असीम पराक्रमी भगवान वासुदेव की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए।
 
Therefore, thinking that these are human beings, all the gods like Indra and the human beings of the world should not ignore the infinitely mighty Lord Vasudev.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)