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mahabharat 6.66.14: हे सुरेशश्रेष्ठगण! शंख, चक्र और गदा धारण करने वाले उन महाबली भगवान वासुदेव को मनुष्य समझकर उनका अनादर नहीं करना चाहिए॥14॥   |   mahabharat अध्याय 6.66: नारायणावतार श्रीकृष्ण एवं नरावतार अर्जुनकी महिमाका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 66: नारायणावतार श्रीकृष्ण एवं नरावतार अर्जुनकी महिमाका प्रतिपादन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  6.66.14 
तथा मनुष्योऽयमिति कदाचित् सुरसत्तमा:।
नावज्ञेयो महावीर्य: शङ्खचक्रगदाधर:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
हे सुरेशश्रेष्ठगण! शंख, चक्र और गदा धारण करने वाले उन महाबली भगवान वासुदेव को मनुष्य समझकर उनका अनादर नहीं करना चाहिए॥14॥
 
Sureshresthagan! One should not disrespect that mighty Lord Vasudeva who holds the conch, disc and mace by thinking that he is a human being. 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)