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mahabharat 6.65.d2h-72: हे प्रभु! इस प्रकार आपने मुझे उत्पन्न किया है। आपसे अभिन्न होने के कारण मैं भी वासुदेव के समान हूँ। हे जगत के स्वामी! अतः मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ कि आप इन चार रूपों (वासुदेव, संकर्षण, प्रद्युम्न और अनिरुद्ध) में विभक्त होकर मनुष्य शरीर धारण करें ॥ 72॥   |   mahabharat अध्याय 6.65: धृतराष्ट्र-संजय-संवादके प्रसंगमें दुर्योधनके द्वारा पाण्डवोंकी विजयका कारण पूछनेपर भीष्मका ब्रह्माजीके द्वारा की हुई भगवत्-स्तुतिका कथन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.65.d2h-72 
वासुदेवमय: सोऽहं त्वयैवास्मि विनिर्मित:।
(तस्माद् याचामि लोकेश चतुरात्मानमात्मना।)
विभज्य भागशोऽऽत्मानं व्रज मानुषतां विभो॥ ७२॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! इस प्रकार आपने मुझे उत्पन्न किया है। आपसे अभिन्न होने के कारण मैं भी वासुदेव के समान हूँ। हे जगत के स्वामी! अतः मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ कि आप इन चार रूपों (वासुदेव, संकर्षण, प्रद्युम्न और अनिरुद्ध) में विभक्त होकर मनुष्य शरीर धारण करें ॥ 72॥
 
Lord! Thus you have created me. Being inseparable from you, I too am like Vasudeva. O lord of the world! Therefore I request you to divide yourself into these four forms (Vasudeva, Sankarshana, Pradyumna and Aniruddha) and take a human body. ॥ 72॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)