Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.65.74: हे अपार पराक्रमी पुरुष! संसार के बड़े-बड़े ऋषिगण और देवतागण एकाग्रचित्त होकर आपकी लीला के अनुसार नामों से आपके दिव्य स्वरूप का स्तुतिगान करते रहते हैं॥ 74॥ | mahabharat अध्याय 6.65: धृतराष्ट्र-संजय-संवादके प्रसंगमें दुर्योधनके द्वारा पाण्डवोंकी विजयका कारण पूछनेपर भीष्मका ब्रह्माजीके द्वारा की हुई भगवत्-स्तुतिका कथन । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
त्वां हि ब्रह्मर्षयो लोके देवाश्चामितविक्रम।
तैस्तैर्हि नामभिर्युक्ता गायन्ति परमात्मकम्॥ ७४॥
अनुवाद
हे अपार पराक्रमी पुरुष! संसार के बड़े-बड़े ऋषिगण और देवतागण एकाग्रचित्त होकर आपकी लीला के अनुसार नामों से आपके दिव्य स्वरूप का स्तुतिगान करते रहते हैं॥ 74॥
O Supreme Being of immense power! The great sages and gods of the world with their minds focused keep on singing praises of Your divine form by the names according to Your divine play. ॥ 74॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥