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mahabharat 6.65.7-8h: दैवी स्वभाव के कारण मुझे बहुत कठोर दंड मिल रहा है। संजय! पांडव अजेय क्यों हैं और मेरे पुत्र क्यों मारे जा रहे हैं? यह सब मुझे विस्तारपूर्वक बताओ।   |   mahabharat अध्याय 6.65: धृतराष्ट्र-संजय-संवादके प्रसंगमें दुर्योधनके द्वारा पाण्डवोंकी विजयका कारण पूछनेपर भीष्मका ब्रह्माजीके द्वारा की हुई भगवत्-स्तुतिका कथन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.65.7-8h 
मय्येव दण्ड: पतति दैवात् परमदारुण:।
यथावध्या: पाण्डुसुता यथा वध्याश्च मे सुता:॥ ७॥
एतन्मे सर्वमाचक्ष्व याथातथ्येन संजय।
 
 
अनुवाद
दैवी स्वभाव के कारण मुझे बहुत कठोर दंड मिल रहा है। संजय! पांडव अजेय क्यों हैं और मेरे पुत्र क्यों मारे जा रहे हैं? यह सब मुझे विस्तारपूर्वक बताओ।
 
Due to the divine nature, I am being punished very badly. Sanjay! Why are the Pandavas invincible and why are my sons being killed? Tell me all this in detail.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)