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mahabharat 6.65.65-66: पद्मनाभ! विशाललोचन! दुःख को दूर करने वाले श्रीकृष्ण! आप समस्त प्राणियों के आश्रय और नेता हैं, आप जगत के गुरु हैं। देवेश्वर! आपकी कृपा से ही समस्त देवता सदैव प्रसन्न रहते हैं। 65-66।   |   mahabharat अध्याय 6.65: धृतराष्ट्र-संजय-संवादके प्रसंगमें दुर्योधनके द्वारा पाण्डवोंकी विजयका कारण पूछनेपर भीष्मका ब्रह्माजीके द्वारा की हुई भगवत्-स्तुतिका कथन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.65.65-66 
पद्मनाभ विशालाक्ष कृष्ण दु:खप्रणाशन॥ ६५॥
त्वं गति: सर्वभूतानां त्वं नेता त्वं जगद्‍गुरु:।
त्वत्प्रसादेन देवेश सुखिनो विबुधा: सदा॥ ६६॥
 
 
अनुवाद
पद्मनाभ! विशाललोचन! दुःख को दूर करने वाले श्रीकृष्ण! आप समस्त प्राणियों के आश्रय और नेता हैं, आप जगत के गुरु हैं। देवेश्वर! आपकी कृपा से ही समस्त देवता सदैव प्रसन्न रहते हैं। 65-66।
 
Padmanabha! Vishallochan! The one who removes sorrow, Sri Krishna! You are the shelter and leader of all living beings, you are the Guru of the world. Deveshwar! All the gods are always happy only because of your blessings. 65-66.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)