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mahabharat 6.65.63-65h: हे प्रभु! हम आपकी आराधना में तत्पर रहते हैं। आपके नियमों का पालन करते हुए हम आपकी शरण में हैं। हे विष्णु! हम सदैव आपकी, परमप्रभु एवं महेश्वर की आराधना करते हैं। आपकी कृपा से ही हमने पृथ्वी पर ऋषि, देवता, गंधर्व, यक्ष, राक्षस, नाग, पिशाच, मनुष्य, मृग, पक्षी और कीट उत्पन्न किए हैं।   |   mahabharat अध्याय 6.65: धृतराष्ट्र-संजय-संवादके प्रसंगमें दुर्योधनके द्वारा पाण्डवोंकी विजयका कारण पूछनेपर भीष्मका ब्रह्माजीके द्वारा की हुई भगवत्-स्तुतिका कथन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 65: धृतराष्ट्र-संजय-संवादके प्रसंगमें दुर्योधनके द्वारा पाण्डवोंकी विजयका कारण पूछनेपर भीष्मका ब्रह्माजीके द्वारा की हुई भगवत्-स्तुतिका कथन  »  श्लोक 63-65h
 
 
श्लोक  6.65.63-65h 
त्वद्भक्तिनिरता देव नियमैस्त्वां समाश्रिता:।
अर्चयाम: सदा विष्णो परमेशं महेश्वरम्॥ ६३॥
ऋषयो देवगन्धर्वा यक्षराक्षसपन्नगा:।
पिशाचा मानुषाश्चैव मृगपक्षिसरीसृपा:॥ ६४॥
एवमादि मया सृष्टं पृथिव्यां त्वत्प्रसादजम्।
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! हम आपकी आराधना में तत्पर रहते हैं। आपके नियमों का पालन करते हुए हम आपकी शरण में हैं। हे विष्णु! हम सदैव आपकी, परमप्रभु एवं महेश्वर की आराधना करते हैं। आपकी कृपा से ही हमने पृथ्वी पर ऋषि, देवता, गंधर्व, यक्ष, राक्षस, नाग, पिशाच, मनुष्य, मृग, पक्षी और कीट उत्पन्न किए हैं।
 
O Lord! We remain engaged in your worship. We take refuge in you while following your rules. Vishnu! We always worship you, the Supreme Lord and Maheshwar. It is by your grace that we have created sages, gods, Gandharvas, Yakshas, ​​demons, snakes, vampires, humans, deers, birds and insects on earth. 63-64 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)